हिन्दुस्तानी संगीत के राग: हिन्दी स्रोत - निःशुल्क डाउनलोड
हिन्दी विकिपीडिया की राग श्रेणियों से चयनित राग और उनके मूल परिचय। स्रोत में उपलब्ध नाम एवं विवरण यथावत हैं; यह सभी रागों की पूर्ण सूची नहीं है। कुल 25 रिकॉर्ड. Excel और CSV प्रारूपों में डाउनलोड करें.
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🏷️ संगीत
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| नाम | मूल विवरण | स्रोत लिंक |
|---|---|---|
| अल्हैयाबिलावल | यह राग बिलावल थाट से निकलता है। इसमें सब स्वर शुद्ध लगते हैं। केवल अवरोह में थोड़ा कोमल नी लगाया जाता है। आरोह में म वर्ज्य हैं, इसलिये इस राग की जाति षाडव-संपूर्ण मानी जाती है। वादी ध और सम्वादी ग मा… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%85%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%88%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%B2&oldid=3972818 |
| काफ़ी राग | यह राग काफी थाट से निकलता है। इसमें ः?ग"' और ः?नी"' कोमल वाकी सब शुद्ध स्वर लगते हैं। वादी स्वर ः?प"' और सम्वादी ः?स"' माना जाता है। इसकी जाति सम्पूर्ण मानी जाती है। इस राग में होली के गीत बहुत गाये ज… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%AB%E0%A4%BC%E0%A5%80_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97&oldid=6404498 |
| जयजयवन्ती | जयजयवन्ती , हिन्दुस्तानी शास्त्रीय संगीत का एक राग है। गुरु ग्रन्थ साहिब के अनुसार यह राग, बिलवाल और सोरठ नामक दो अन्य रागों का मिश्रण है। यह राग, गुरबानी के उत्तरार्ध में आया है। नौवें गुरु तेग बहादु… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%9C%E0%A4%AF%E0%A4%B5%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A5%80&oldid=4564688 |
| जौनपुरी | जौनपुरी राग को असवारी थाट से उपजा हुआ राग माना गया है। इस राग में ग , ध, नी स्वर कोमल लगते हैं । आरोह में ग (गंधार ) वर्ज्य है अर्थात गाते बजाते समय आरोह में ग स्वर को छोड़ देते हैं। अवरोह में सातों स… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%9C%E0%A5%8C%E0%A4%A8%E0%A4%AA%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%80&oldid=6021084 |
| बिहाग | यह राग बिलावल ठाठ से उतपन्न होता है। इसके आरोह में रे और ध नहीं लगाते और अवरोह में सातों स्वर लगते हैं, इसलिये इसकी जाति औडव-सम्पूर्ण मानी जाती है। इसमें सब स्वर शुद्ध लगते है। कुशल संगीतज्ञ बड़ी कुशल… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AC%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%97&oldid=5634907 |
| भीमपलासी | यह राग काफी थाट से निकलता है। आरोह में रे और ध"' नहीं लगता और अवरोह में सब स्वर लगते हैं, इसलिये इस की जाति औडव-सम्पूर्ण मानी जाती है। इसमें ग"' और नी"' कोमल लगते हैं। वादी स्वर म"' और सम्वादी स्वर स"… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A5%80%E0%A4%AE%E0%A4%AA%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A5%80&oldid=6287532 |
| भैरव राग | भैरव राग राग भैरव थाट का राग है। यह राग भैरव थाट के नाम जैसे होने से इसे भैरव थाट का आश्रय राग कहा जाता है। इस राग में सात स्वर लगते हैं, इसलिये इसकी जाति सम्पूर्ण (सम्पूर्ण-सम्पूर्ण) मानी जाती है। इस… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AD%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%B5_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97&oldid=6383074 |
| मल्हार राग | मल्हार राग/ मेघ मल्हार, हिंदुस्तानी व कर्नाटिक संगीत में पाया जाता है। मल्हार का मतलब बारिश या वर्षा है और माना जाता है कि मल्हार राग के गानों को गाने से वर्षा होता है। मल्हार राग को कर्नाटिक शैली में… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0_%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97&oldid=5248251 |
| मालकोश | यह राग भैरवी थाट से निकलता है। इसमें ऋषभ और पंचम स्वर नहीं लगते इसलिये इसकी जाति औडव मानी जाती है। इसमें गंधार धैवत और निषाद कोमल लगते है। इसका वादी स्वर मध्यम तथा सम्वादी स्वर षड्ज माना जाता है। | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B6&oldid=3990180 |
| राग अंजनी टोड़ी | राग अंजनी तोड़ी हिंदुस्तानी संगीत में एक राग है, जो किसी गीत के बीच में पंचम और मध्यम को जोड़ता है। | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%85%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80_%E0%A4%9F%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A5%80&oldid=6204776 |
| राग गौड़सारङ्ग | गौड़ सारंग , भारतीय संगीत का एक राग है। इसके गायन का समय दोपहर (मध्याह्न काल) है। | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%97%E0%A5%8C%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%99%E0%A5%8D%E0%A4%97&oldid=4789996 |
| राग दरबारी कान्हड़ा | प्राचीन संगीत ग्रन्थों में राग दरबारी कान्हड़ा के लिये भिन्न नामों का उल्लेख मिलता है। कुछ ग्रन्थों में इसका नाम कणार्ट, कुछ में कणार्टकी तो अन्य ग्रन्थों में कणार्ट गौड़ उपलब्ध है। वस्तुत: कन्हण शब्द… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%80_%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE&o… |
| राग बसंत | राग बसंत या राग वसंत शास्त्रीय संगीत की हिंदुस्तानी पद्धति का राग है। वसंत का अर्थ वसंत ऋतु से है, अतः इसे विशेष रूप से वसंत ऋतु में गाया बजाया जाता है। इसके आरोह में पाँच तथा अवरोह में सात स्वर होते… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%AC%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%A4&oldid=5196825 |
| राग बहार | राग बहार काफ़ी थाट से उत्पन्न षाड़व षाड़व जाति का राग है। अर्थात इसके आरोह तथा अवरोह से छे छे स्वरों का प्रयोग होता है। इसके गाने का समय रात्रि का दूसरा प्रहर है। गांधार और निषाद दोनो स्वर कोमल है लेक… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%AC%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%B0&oldid=5425779 |
| राग बागेश्वरी | राग बागेश्वरी काफी थाट का राग है इसके गायन वादन का समय रात्रि का है। इस राग मैं ७ स्वरो का प्रयोग हुआ है। गन्धार व निषाद कोमल है। | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%AC%E0%A4%BE%E0%A4%97%E0%A5%87%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%80&oldid=3071360 |
| राग भूपाली | इस राग का चलन मुख्यत: मन्द्र और मध्य सप्तक के प्रतह्म हिस्से में होती है (पूर्वांग प्रधान राग)। इस राग में ठुमरी नहीं गायी जाती मगर, बड़ा खयाल, छोटा खयाल, तराना आदि गाया जाता है। कर्नाटक संगीत में इसे… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%AD%E0%A5%82%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80&oldid=6252227 |
| राग भैरवी | '''' रे ग ध नि कोमल राखत, मानत मध्यम वादी। | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%AD%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A4%B5%E0%A5%80&oldid=5196824 |
| राग मुल्ताली | थाठ: तोड़ी वादी: प संवादी : सा जाति : औडव-संपूर्ण आरोह में रे और ध वर्जित स्वर हैं गायन समय: दिन का चौथा प्रहर स्वर :- कोमल रे, कोमल ग, तीव्र म का प्रयोग, बाकी सब स्वर शुद्ध | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%80&oldid=5182492 |
| राग मेघमल्लार | वर्षा ऋतु में गाने वाला राग, जिनसे बारिश होती है। | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%98%E0%A4%AE%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B0&oldid=6166770 |
| राग ललित | राग बसंत या राग वसंत शास्त्रीय संगीत की हिंदुस्तानी पद्धति का राग है। राग ललित सन्धिप्रकाश रागो के अन्तर्गत आता है। यह एक गम्भी्र प्रकृति का उत्तरांग प्रधान राग है। इसे गाते व बजाते समय इसका विस्तार म… | https://hi.wikipedia.org/w/index.php?title=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%97_%E0%A4%B2%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%A4&oldid=6526615 |